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25 अक्टूबर 2026 का पंचांग: शरद पूर्णिमा और शुभ मुहूर्त


25 अक्टूबर 2026 का पंचांग: शरद पूर्णिमा और शुभ मुहूर्त

नई दिल्ली, 25 अक्टूबर 2026: रविवार का दिन धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। 25 अक्टूबर 2026 का पंचांग बताता है कि आज आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि सुबह 11:56 बजे तक रहेगी। इसके बाद पूर्णिमा तिथि शुरू होगी। आज शरद पूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा। भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और चंद्रदेव की आराधना के लिए इस दिन का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।

आज रेवती नक्षत्र, हर्षण योग और पूर्णिमा तिथि का संयोग बन रहा है। श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार पूजा-पाठ, दान और चंद्र दर्शन कर सकते हैं।

📅 आज का पंचांग (25 अक्टूबर 2026)

  • वार: रविवार
  • मास: आश्विन
  • पक्ष: शुक्ल पक्ष
  • तिथि: चतुर्दशी सुबह 11:56 बजे तक, इसके बाद पूर्णिमा
  • पूर्णिमा तिथि समाप्त: 26 अक्टूबर, सुबह लगभग 09:41 बजे
  • नक्षत्र: रेवती शाम 07:22 बजे तक, इसके बाद अश्विनी
  • योग: हर्षण शाम 05:22 बजे तक, इसके बाद वज्र
  • करण: वणिज सुबह 11:56 बजे तक, इसके बाद विष्टि (भद्रा) रात 10:52 बजे तक
  • चंद्र राशि: मीन, शाम को मेष में प्रवेश
  • सूर्य राशि: तुला
  • ऋतु: शरद
  • प्रमुख पर्व: शरद पूर्णिमा और कोजागरी पूजा

🌸 शुभ समय (दिल्ली समयानुसार)

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:46 से 05:37 बजे तक
  • अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:43 से दोपहर 12:28 बजे तक
  • अमृत काल: शाम 05:05 से 06:36 बजे तक
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 01:57 से 02:42 बजे तक
  • सूर्योदय: सुबह 06:28 बजे
  • सूर्यास्त: शाम 05:42 बजे
  • चंद्रोदय: शाम लगभग 05:00 बजे
  • निशीथ काल: रात 11:40 से अगले दिन 12:31 बजे तक

⚠️ अशुभ समय (दिल्ली समयानुसार)

  • राहुकाल: शाम 04:18 से 05:42 बजे तक
  • यमगंड काल: दोपहर 12:05 से 01:29 बजे तक
  • गुलिक काल: दोपहर 02:54 से शाम 04:18 बजे तक
  • भद्रा काल: सुबह 11:56 बजे से रात 10:52 बजे तक

हिंदू पंचांग की पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार राहुकाल और यमगंड के दौरान नए शुभ कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि, किसी विशेष धार्मिक अनुष्ठान का मुहूर्त निर्धारित करने के लिए स्थानीय पंचांग और संबंधित परंपरा का ध्यान रखना चाहिए।

🌕 शरद पूर्णिमा 2026 का धार्मिक महत्व

शरद पूर्णिमा को कई क्षेत्रों में कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है। धार्मिक परंपराओं में इस अवसर पर माता लक्ष्मी की पूजा, भगवान विष्णु का स्मरण और चंद्र दर्शन का विशेष महत्व बताया गया है।

इस वर्ष पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर को सुबह 11:56 बजे से शुरू होकर 26 अक्टूबर को सुबह लगभग 09:41 बजे तक रहेगी। पूर्णिमा की रात 25 अक्टूबर को पड़ने के कारण इसी दिन शरद पूर्णिमा का उत्सव मनाया जाएगा।

कई परिवारों में इस अवसर पर खीर तैयार करने और चंद्रमा की रोशनी में रखने की परंपरा है। यह एक धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यता है; इसे किसी रोग के उपचार का विकल्प नहीं समझना चाहिए।

🪔 शरद पूर्णिमा पर पूजा कैसे करें?

श्रद्धालु शाम के समय घर के पूजा स्थान की सफाई करके दीपक जला सकते हैं। माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा में पुष्प, फल और नैवेद्य अर्पित किए जाते हैं।

चंद्रोदय के बाद चंद्रदेव को अर्घ्य देने की परंपरा भी प्रचलित है। कई स्थानों पर श्रद्धालु लक्ष्मी मंत्र का जाप करते हैं और रात्रि में भजन-कीर्तन का आयोजन करते हैं।

🕉️ आज का धार्मिक उपाय

रविवार और शरद पूर्णिमा के अवसर पर श्रद्धालु अपनी आस्था के अनुसार भगवान सूर्य को जल अर्पित कर सकते हैं। शाम को माता लक्ष्मी की पूजा करें और “ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” मंत्र का जाप करें।

जरूरतमंद लोगों को भोजन, वस्त्र या अन्य उपयोगी सामग्री दान करना भी एक सकारात्मक सामाजिक और धार्मिक परंपरा है।

निष्कर्ष

25 अक्टूबर 2026 का पंचांग शरद पूर्णिमा, चतुर्दशी से पूर्णिमा में परिवर्तन, रेवती नक्षत्र और हर्षण योग के कारण विशेष है। पूजा-पाठ और अन्य धार्मिक कार्यों की योजना बनाते समय दिल्ली के शुभ-अशुभ समय को ध्यान में रखें। अलग-अलग शहरों में सूर्योदय और मुहूर्त में कुछ मिनटों का अंतर संभव है।

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