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चीनी के बढ़ते दाम पर केजरीवाल के सवाल, ISMA बोला- पर्याप्त स्टॉक


चीनी के बढ़ते दाम पर केजरीवाल के सवाल, ISMA बोला- पर्याप्त स्टॉक

चीनी की बढ़ती कीमतों पर सियासी घमासान: केजरीवाल ने एथेनॉल नीति पर उठाए सवाल, ISMA ने कहा- पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध

नई दिल्ली, 25 अगस्त 2026: देश में हाल के दिनों में चीनी की कीमतों में तेजी को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने बढ़ती कीमतों के लिए केंद्र सरकार की एथेनॉल नीति और गन्ने के इस्तेमाल को जिम्मेदार ठहराया है। वहीं, इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि देश में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता है और कीमतों में हालिया तेजी के पीछे मुख्य वजह घबराहट और सट्टेबाजी वाली खरीदारी रही है।

केजरीवाल का दावा: 17 दिनों में करीब ₹20 प्रति किलो बढ़ी चीनी की कीमत

अरविंद केजरीवाल ने हाल ही में जारी एक वीडियो संदेश में चीनी की कीमतों में तेजी का मुद्दा उठाया। उनके मुताबिक, करीब 17 दिन पहले चीनी लगभग ₹46 प्रति किलो के स्तर पर उपलब्ध थी, जो बढ़कर करीब ₹65 प्रति किलो तक पहुंच गई है।

केजरीवाल ने आरोप लगाया कि पेट्रोल में एथेनॉल ब्लेंडिंग बढ़ाने की नीति के तहत बड़ी मात्रा में गन्ने को चीनी उत्पादन से हटाकर एथेनॉल उत्पादन की ओर मोड़ा गया। उनका तर्क है कि इससे घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता प्रभावित हुई और कीमतों में तेजी आई।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने का इस्तेमाल बढ़ाया जाता है तो घरेलू खपत के लिए पर्याप्त चीनी कैसे उपलब्ध रहेगी। केजरीवाल ने इस स्थिति को विदेशी मुद्रा से भी जोड़ते हुए कहा कि तेल आयात पर विदेशी मुद्रा बचाने के उद्देश्य से एथेनॉल को बढ़ावा दिया गया, लेकिन यदि चीनी का आयात करना पड़ा तो विदेशी मुद्रा फिर खर्च करनी पड़ सकती है।

ISMA ने दावे को बताया गलत, कहा- चीनी का पर्याप्त स्टॉक

दूसरी ओर, ISMA के महानिदेशक दीपक बल्लानी ने कहा है कि देश में चीनी की उपलब्धता को लेकर कोई बड़ी समस्या नहीं है। उनके अनुसार, पिछले करीब 20 दिनों में कीमतों में हुई वृद्धि का प्रमुख कारण पैनिक और सट्टेबाजी वाली खरीदारी रहा है। उनका कहना है कि ऐसी खरीदारी का दबाव कम होने के बाद चीनी की कीमतों में नरमी आ सकती है।

एथेनॉल को लेकर भी ISMA ने केजरीवाल के आरोपों को खारिज किया है। बल्लानी ने कहा कि एथेनॉल के लिए चीनी की कथित डायवर्जन को हालिया कीमत वृद्धि का कारण नहीं माना जा सकता और घरेलू खपत को प्राथमिकता दी जाती है।

सरकार और उद्योग की ओर से उठाए गए कदम

ISMA के अध्यक्ष नीरज शिरगांवकर के मुताबिक, बाजार में अधिक स्टॉक उपलब्ध कराने के लिए व्यापारियों के पास चीनी रखने की सीमा को 400 टन से घटाकर 200 टन करने का सुझाव दिया गया है।

उन्होंने यह भी बताया कि सरकार पिछले चार से छह महीनों में चीनी मिलों के स्टॉक का भौतिक सत्यापन और व्यापारियों, संस्थागत खरीदारों तथा थोक उपभोक्ताओं पर कुछ सीमाएं लगाने जैसे कदम उठा चुकी है। इसके अलावा, पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 10 लाख टन चीनी के आयात की घोषणा भी की गई है।

असली वजह क्या है?

चीनी की कीमतों को लेकर फिलहाल दो अलग-अलग तस्वीर सामने आ रही हैं। केजरीवाल जहां एथेनॉल नीति और गन्ने के इस्तेमाल में बदलाव को कीमतों में तेजी से जोड़ रहे हैं, वहीं ISMA का कहना है कि देश में पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और हालिया तेजी मुख्य रूप से पैनिक तथा सट्टेबाजी वाली खरीदारी से जुड़ी है।

ऐसे में आने वाले दिनों में चीनी की कीमतों का रुख महत्वपूर्ण रहेगा। यदि बाजार में अतिरिक्त स्टॉक पहुंचता है और घबराहट वाली खरीदारी कम होती है, तो कीमतों में नरमी देखने को मिल सकती है। वहीं, यदि घरेलू मांग और आपूर्ति के बीच दबाव बना रहता है तो कीमतों पर असर जारी रह सकता है।

फिलहाल, चीनी की कीमतों पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच उपभोक्ताओं की नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में खुदरा बाजार में कीमतें कम होती हैं या तेजी का सिलसिला जारी रहता है।

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