धनतेरस 2026 कब है? जानें पूजा मुहूर्त, विधि और शुभ खरीदारी | Prime Assure News
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धनतेरस 2026: जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, तारीख और महत्व


धनतेरस 2026: जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, तारीख और महत्व

धनतेरस 2026: जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, तारीख और महत्व

नई दिल्ली, 24 अक्टूबर 2026: दिवाली के पांच दिवसीय उत्सव की शुरुआत धनतेरस से होती है। इस वर्ष धनतेरस 2026 शुक्रवार, 6 नवंबर को मनाई जाएगी। हिंदू धार्मिक परंपराओं में इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर की पूजा का विशेष महत्व है। इस अवसर पर सोना, चांदी, बर्तन और घर की उपयोगी वस्तुएं खरीदना शुभ माना जाता है।

धनतेरस को धनत्रयोदशी भी कहा जाता है। यह पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक पूजा करने से घर में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का आगमन होता है।

धनतेरस 2026 कब है? जानें सही तारीख

हिंदू पंचांग के अनुसार धनतेरस का पर्व 6 नवंबर 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा।

धनतेरस 2026 की प्रमुख जानकारी:

  • धनतेरस की तारीख: 6 नवंबर 2026
  • दिन: शुक्रवार
  • त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 6 नवंबर, सुबह 10:30 बजे
  • त्रयोदशी तिथि समाप्त: 7 नवंबर, सुबह 10:47 बजे
  • पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 6:02 से 7:57 बजे तक
  • प्रदोष काल: शाम 5:33 से रात 8:09 बजे तक

ये समय नई दिल्ली के पंचांग पर आधारित हैं। दूसरे शहरों में पूजा का समय अलग हो सकता है।

धनतेरस 2026 का शुभ पूजा मुहूर्त

धनतेरस पर माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा प्रदोष काल में करना विशेष शुभ माना जाता है।

नई दिल्ली में इस वर्ष शाम 6:02 बजे से 7:57 बजे तक पूजा का अनुकूल समय रहेगा। यह अवधि वृषभ लग्न के अंतर्गत आती है, जिसे स्थिर लग्न कहा जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार स्थिर लग्न में लक्ष्मी पूजा करने का संबंध घर में स्थायी सुख-समृद्धि की कामना से जोड़ा जाता है।

धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा क्यों की जाती है?

पौराणिक कथाओं के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्हें आयुर्वेद और आरोग्य का देवता माना जाता है।

इसी कारण धनतेरस का संबंध केवल धन-संपत्ति से नहीं, बल्कि अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना से भी है।

कई परिवार इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा करके परिवार के सदस्यों के स्वस्थ और सुखी जीवन की प्रार्थना करते हैं।

धनतेरस 2026 पर पूजा कैसे करें?

धनतेरस की पूजा के लिए घर के पूजा स्थल को साफ करके दीपक जलाने की परंपरा है।

पूजा की सामान्य विधि:

  1. सुबह घर और पूजा स्थल की साफ-सफाई करें।
  2. शाम के समय पूजा स्थल पर माता लक्ष्मी, भगवान गणेश, कुबेर और धन्वंतरि का चित्र या प्रतिमा स्थापित करें।
  3. घी या तेल का दीपक जलाएं।
  4. फूल, अक्षत, रोली और मिठाई अर्पित करें।
  5. भगवान धन्वंतरि और कुबेर का स्मरण करें।
  6. माता लक्ष्मी से परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।
  7. पूजा के बाद आरती करें और प्रसाद वितरित करें।

पूजा की विधि स्थानीय परंपराओं और पारिवारिक मान्यताओं के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

धनतेरस पर क्या खरीदना शुभ माना जाता है?

धनतेरस के अवसर पर नई वस्तुएं खरीदने की परंपरा काफी पुरानी है। बाजारों में इस दिन विशेष रूप से आभूषण, धातु के बर्तन और घरेलू सामान की खरीदारी की जाती है।

सोना और चांदी

धनतेरस पर सोने और चांदी के आभूषण या सिक्के खरीदना समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

पीतल और तांबे के बर्तन

कई परिवार धनतेरस पर पीतल, तांबे या स्टील के बर्तन खरीदते हैं। इन्हें घर की उपयोगिता और शुभ शुरुआत से जोड़कर देखा जाता है।

झाड़ू खरीदने की परंपरा

कुछ क्षेत्रों में धनतेरस पर नई झाड़ू खरीदना भी शुभ माना जाता है। लोकमान्यता के अनुसार इसका संबंध घर की स्वच्छता और नकारात्मकता दूर करने से है।

घर की उपयोगी वस्तुएं

आज के समय में लोग अपनी आवश्यकता और बजट के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, घरेलू सामान और अन्य उपयोगी वस्तुएं भी खरीदते हैं।

ध्यान रखना जरूरी है कि धनतेरस का धार्मिक महत्व महंगी खरीदारी पर निर्भर नहीं करता।

धनतेरस पर यम दीपदान का महत्व

धनतेरस की शाम यम दीपदान की भी परंपरा है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर दीपक जलाकर भगवान यम का स्मरण किया जाता है।

यह परंपरा परिवार की सुरक्षा और अकाल मृत्यु से रक्षा की प्रार्थना से जुड़ी हुई है।

हालांकि इसे धार्मिक आस्था के रूप में समझना चाहिए, किसी निश्चित परिणाम की गारंटी के रूप में नहीं।

धनतेरस और दिवाली का क्या संबंध है?

धनतेरस दिवाली उत्सव का प्रारंभिक पर्व है। इसके बाद नरक चतुर्दशी, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज जैसे त्योहार मनाए जाते हैं।

धनतेरस पर जहां स्वास्थ्य, धन और समृद्धि की कामना की जाती है, वहीं दिवाली पर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की विशेष पूजा का महत्व है।

दोनों पर्व भारतीय संस्कृति में परिवार, आस्था और नई शुरुआत की भावना को दर्शाते हैं।

निष्कर्ष

धनतेरस 2026 शुक्रवार, 6 नवंबर को मनाई जाएगी। नई दिल्ली में शाम 6:02 बजे से 7:57 बजे तक लक्ष्मी-कुबेर पूजा का शुभ मुहूर्त रहेगा।

यह त्योहार केवल सोना-चांदी खरीदने का अवसर नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, परिवार की खुशहाली और समृद्धि की कामना करने का भी पर्व है। श्रद्धालु अपनी परंपरा और सामर्थ्य के अनुसार पूजा तथा खरीदारी करके धनतेरस मना सकते हैं।

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