नेहा बोरा कौन हैं? JNU, AISA और आंदोलन की पूरी कहानी | Prime Assure News
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नेहा बोरा कौन हैं? JNU से छात्र आंदोलन तक का सफर


नेहा बोरा कौन हैं? JNU से छात्र आंदोलन तक का सफर

नेहा बोरा कौन हैं? JNU से छात्र आंदोलन तक का सफर

नई दिल्ली, 6 अक्टूबर 2026: छात्र आंदोलनों और शिक्षा से जुड़े मुद्दों के बीच पिछले कुछ महीनों में नेहा बोरा का नाम राष्ट्रीय स्तर पर तेजी से चर्चा में आया है। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) की रिसर्च स्कॉलर और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा छात्र अधिकारों, शिक्षा व्यवस्था और हाल के चुनावी मुद्दों को लेकर होने वाले प्रदर्शनों में सक्रिय नजर आई हैं।

अक्टूबर की शुरुआत में दिल्ली के जंतर-मंतर और उसके आसपास हुए प्रदर्शनों के दौरान भी नेहा बोरा सुर्खियों में रहीं। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर अपनी आपत्तियां सामने रख रहे थे। इन प्रदर्शनों के दौरान नेहा बोरा समेत कई लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया।

नेहा बोरा कौन हैं?

नेहा बोरा मूल रूप से उत्तराखंड के खटीमा से बताई जाती हैं। उनकी शुरुआती जिंदगी का कुछ हिस्सा पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में भी बीता। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और इसके बाद डॉ. बी.आर. आंबेडकर यूनिवर्सिटी दिल्ली से मास्टर्स किया। वर्तमान में वह JNU के School of Arts and Aesthetics में PhD रिसर्च कर रही हैं।

पढ़ाई के साथ-साथ नेहा बोरा का जुड़ाव थिएटर और छात्र गतिविधियों से भी रहा है। इसी वजह से उनकी पहचान केवल एक रिसर्च स्कॉलर तक सीमित नहीं रही, बल्कि छात्र आंदोलनों में सक्रिय चेहरे के रूप में भी बनी है।

AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं नेहा बोरा

नेहा बोरा ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन यानी AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। संगठन छात्र अधिकारों, शिक्षा और विश्वविद्यालयों से जुड़े मुद्दों पर आंदोलनों में सक्रिय रहा है।

पिछले कुछ समय में नेहा बोरा ने परीक्षा व्यवस्था, छात्रों के अधिकार और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से जुड़े मुद्दों पर सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखी है। इसी सक्रियता ने उन्हें राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में ला दिया।

23 दिन की भूख हड़ताल से मिली राष्ट्रीय पहचान

नेहा बोरा को व्यापक पहचान दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन के दौरान मिली। रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने करीब 23 दिनों तक भूख हड़ताल में हिस्सा लिया। इस दौरान वह शिक्षा सुधार और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर रही थीं।

इस आंदोलन में शिक्षा कार्यकर्ता सोनम वांगचुक समेत अन्य छात्र नेताओं की भी मौजूदगी रही। लंबे समय तक चले इस प्रदर्शन के बाद नेहा बोरा सोशल मीडिया और राष्ट्रीय मीडिया में चर्चा का प्रमुख चेहरा बन गईं।

जंतर-मंतर प्रदर्शन और पुलिस हिरासत

अक्टूबर 2026 की शुरुआत में नेहा बोरा एक बार फिर दिल्ली के जंतर-मंतर से जुड़े प्रदर्शनों में नजर आईं। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR को लेकर विरोध जता रहे थे।

2 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने 500 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया था। इनमें नेहा बोरा, आतिशी, सौरभ भारद्वाज और योगेंद्र यादव समेत कई प्रमुख नाम शामिल थे।

इसके अगले दिनों में भी प्रदर्शन जारी रहे। 3 और 4 अक्टूबर को नेहा बोरा समेत कई प्रदर्शनकारियों को दोबारा हिरासत में लिए जाने की रिपोर्ट सामने आई। पुलिस का कहना था कि इन प्रदर्शनों के लिए अनुमति नहीं दी गई थी।

पुलिस पर लगाए गए आरोपों पर भी चर्चा

4 अक्टूबर को नेहा बोरा की हिरासत को लेकर AISA की ओर से कुछ आरोप लगाए गए। संगठन के सदस्यों ने दावा किया कि उन्हें एक निजी वाहन में ले जाया गया और बाद में नरेला इंडस्ट्रियल एरिया पुलिस स्टेशन में छोड़ा गया। पुलिस की ओर से इन आरोपों को खारिज किया गया और प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों के साथ कथित बदसलूकी का भी उल्लेख किया गया।

इसी बीच 5 अक्टूबर को महिला पत्रकारों द्वारा पुलिसकर्मियों पर लगाए गए कथित यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर भी नेहा बोरा ने सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दावा किया कि मामले को लेकर प्रदर्शन कर रहे पत्रकारों को हिरासत में लिया गया।

छात्र राजनीति से राष्ट्रीय पहचान तक

नेहा बोरा की कहानी को केवल हाल के विरोध प्रदर्शनों तक सीमित करके देखना सही नहीं होगा। JNU में शोध, थिएटर से जुड़ाव और छात्र राजनीति में सक्रिय भूमिका ने उनके सार्वजनिक जीवन की नींव तैयार की।

आज वह AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर छात्र मुद्दों को राष्ट्रीय मंच पर उठाती दिखाई देती हैं। उनके समर्थक उन्हें छात्र अधिकारों की मुखर आवाज मानते हैं, जबकि उनके राजनीतिक रुख और आंदोलनों को लेकर आलोचना भी होती रही है।

निष्कर्ष

नेहा बोरा फिलहाल भारतीय छात्र राजनीति में चर्चा में रहने वाले प्रमुख युवा चेहरों में से एक हैं। JNU की रिसर्च स्कॉलर से AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने और जंतर-मंतर के आंदोलनों में सक्रिय भूमिका तक उनका सफर तेजी से राष्ट्रीय पहचान में बदला है।

अक्टूबर 2026 के प्रदर्शनों ने उनकी सार्वजनिक मौजूदगी को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। आने वाले समय में शिक्षा, छात्र अधिकार और लोकतांत्रिक मुद्दों पर उनकी सक्रियता किस दिशा में जाती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

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