Share Market 23 October 2026: सेंसेक्स, निफ्टी का हाल | Prime Assure News
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Share Market 23 October 2026: सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट


Share Market 23 October 2026: सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट

नई दिल्ली, 23 अक्टूबर 2026: भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को एक बार फिर बिकवाली का दबाव देखने को मिला। Share Market 23 October 2026 के कारोबारी सत्र में सेंसेक्स, निफ्टी 50 और बैंक निफ्टी गिरावट के साथ बंद हुए। वैश्विक बाजारों की कमजोरी, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और निवेशकों की सतर्कता ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया। दिन के निचले स्तरों से कुछ सुधार जरूर हुआ, लेकिन प्रमुख सूचकांक हरे निशान में वापसी नहीं कर सके।

Sensex Closing: 125 अंक गिरकर 73,123.83 पर बंद

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स शुक्रवार को 125.56 अंक यानी 0.17 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,123.83 पर बंद हुआ।

कारोबार के दौरान सेंसेक्स 73,766.51 के उच्चतम और 72,452.37 के न्यूनतम स्तर तक पहुंचा। इससे पता चलता है कि दिनभर बाजार में उतार-चढ़ाव काफी अधिक रहा।

सेंसेक्स में शुरुआती मजबूती टिक नहीं सकी और बिकवाली के कारण सूचकांक दबाव में आ गया। हालांकि अंतिम घंटों में कुछ चुनिंदा बड़ी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी से गिरावट सीमित हुई।

Nifty 50: 22,600 पर बंद हुआ इंडेक्स

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 इंडेक्स 87.65 अंक या 0.39 प्रतिशत गिरकर 22,600.00 पर बंद हुआ।

दिन के दौरान निफ्टी ने 22,787.25 का उच्चतम और 22,372.00 का न्यूनतम स्तर दर्ज किया।

निफ्टी की 50 कंपनियों में से 14 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि 36 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। यह आंकड़ा बताता है कि बाजार में बिकवाली का दायरा बढ़ा हुआ था।

Bank Nifty: बैंकिंग शेयरों में ज्यादा दबाव

बैंकिंग सेक्टर के प्रमुख इंडेक्स बैंक निफ्टी में सामान्य बाजार के मुकाबले अधिक कमजोरी रही।

बैंक निफ्टी 638.35 अंक यानी 1.16 प्रतिशत टूटकर 54,287.35 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान इंडेक्स ने 54,990.50 का उच्चतम और 53,942.35 का न्यूनतम स्तर छुआ।

बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र के शेयरों पर दबाव ने इस इंडेक्स के प्रदर्शन को प्रभावित किया। बैंक निफ्टी में आई गिरावट सेंसेक्स और निफ्टी 50 के मुकाबले प्रतिशत के लिहाज से अधिक रही।

शेयर बाजार में गिरावट की प्रमुख वजहें

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 114 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने से भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बढ़ा।

भारत अपनी पेट्रोलियम जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में महंगा कच्चा तेल कंपनियों की लागत, महंगाई और आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है।

वैश्विक बाजारों से कमजोर संकेत

अमेरिकी और एशियाई शेयर बाजारों की कमजोरी का असर घरेलू निवेशकों की धारणा पर भी दिखाई दिया।

पश्चिम एशिया में तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के कारण निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाने को प्राथमिकता दी।

मिडकैप और स्मॉलकैप में बिकवाली

शुक्रवार को बड़ी कंपनियों की तुलना में छोटी और मध्यम आकार की कंपनियों के शेयरों में अधिक गिरावट दर्ज हुई।

निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स लगभग 2.21 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स करीब 2.94 प्रतिशत नीचे बंद हुआ।

इससे संकेत मिला कि कमजोरी केवल प्रमुख इंडेक्स तक सीमित नहीं थी।

Nifty 50 के प्रमुख बढ़ने वाले शेयर

गिरावट वाले बाजार में भी कुछ कंपनियों के शेयरों ने सकारात्मक प्रदर्शन किया।

  • Eternal
  • Apollo Hospitals
  • ONGC
  • Asian Paints
  • TCS

Eternal के शेयर में लगभग 4.25 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और यह निफ्टी 50 के प्रमुख बढ़त वाले शेयरों में शामिल रहा।

Nifty 50 के प्रमुख गिरने वाले शेयर

शुक्रवार को कई वित्तीय और मेटल कंपनियों के शेयरों में बिकवाली देखी गई।

  • Shriram Finance
  • Tata Steel
  • JSW Steel
  • Jio Financial Services
  • Adani Enterprises

Shriram Finance लगभग 3.98 प्रतिशत गिरा और निफ्टी 50 के सबसे कमजोर शेयरों में शामिल रहा।

अगले कारोबारी सत्र में निवेशकों की नजर कहां रहेगी?

23 अक्टूबर को बाजार बंद होने के बाद निवेशकों का ध्यान अगले कारोबारी सत्र, सोमवार 26 अक्टूबर 2026, पर रहेगा।

आने वाले सत्रों में निफ्टी का 22,600 के आसपास का स्तर, बैंकिंग शेयरों की चाल, कच्चे तेल की कीमतें और कंपनियों के तिमाही नतीजे महत्वपूर्ण रह सकते हैं।

विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा निर्धारित करने में भूमिका निभा सकती हैं।

निष्कर्ष

23 अक्टूबर 2026 को भारतीय शेयर बाजार लगातार चौथे कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुआ। सेंसेक्स 73,123.83, निफ्टी 22,600 और बैंक निफ्टी 54,287.35 पर बंद हुए।

वैश्विक अनिश्चितता और व्यापक बिकवाली के बीच बाजार में सतर्कता बनी हुई है। निवेशकों के लिए आने वाले कारोबारी सत्रों में उतार-चढ़ाव, कंपनियों के वित्तीय परिणाम और वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल समाचार और सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसे निवेश की व्यक्तिगत सलाह न माना जाए।

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